'नहीं आता तो गद्दारों को मिल जाती ऑक्सीजन'
कोलकाता। बेलडांगा जब हिंसा और अवरोध की आग में सुलग रहा था, ठीक उसी समय वहां से महज 20 किलोमीटर दूर बहरामपुर की धरती से तृणमूल कांग्रेस के सेकंड-इन-कमांड अभिषेक बनर्जी ने विरोधियों पर जोरदार सियासी प्रहार किया। बेलडांगा की अशांति को भाजपा की साजिश करार देते हुए अभिषेक ने साफ कहा कि अगर वह आज यहां नहीं आते, तो गद्दारों को नई ऑक्सीजन मिल जाती।
अभिषेक बनर्जी ने अपने संबोधन में किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनके निशाने पर निलंबित विधायक हुमायूं कबीर और पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी साफ नजर आए। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के कई लोगों ने अशांति का हवाला देकर आज की सभा टालने की सलाह दी थी। लेकिन मैं जानता था कि अगर मैं नहीं आया, तो इस मिट्टी में पैदा हो रहे नए मीरजाफर को बल मिल जाएगा। एक गद्दार को जनता ने विदा किया है, अब एक और उग आया है। बेलडांगा में प्रवासी मजदूर अलाउद्दीन शेख की मौत के बाद भड़की हिंसा पर अभिषेक ने भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी घटना के पीछे भाजपा के बाबुओं की उकसाहट है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता से अपील की कि वे किसी के बहकावे में आकर कानून हाथ में न लें, क्योंकि हिंसा का सीधा फायदा भाजपा को ही पहुँचता है। अभिषेक ने बेलडांगा में कवरेज के दौरान पत्रकारों पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने मंच से ही प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि पत्रकारों और आम लोगों पर हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने दोहराया कि तृणमूल कांग्रेस किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता का समर्थन नहीं करती है। हुमायूं कबीर पर परोक्ष रूप से हमला जारी रखते हुए अभिषेक ने कहा कि जो लोग आज बाबरी के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, उनका 2019 का इतिहास खंगालना चाहिए। उन्होंने सवाल दागा कि 2019 में जो भाजपा के उम्मीदवार थे, आज उनका भाजपा से क्या गुप्त समझौता है, यह जल्द ही जनता के सामने आ जाएगा। बेलडांगा की आग भले ही शांत हो जाए, लेकिन अभिषेक के इस दौरे ने मुर्शिदाबाद की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है। अब देखना यह है कि गद्दार कहे जाने वाले नेता इस पर क्या पलटवार करते हैं।